मध्य प्रदेशः पिपरिया में मूंग के किसानों के साथ धोखा, भुगतान में मिले चेक हो गए बाउंस

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जून में किसानों ने कॉन्ट्रेक्ट किया था. सितंबर में नये कानून लागू हुए थे, फिर भी सरकार ने कह दिया कि नये कानून से न्याय मिला. अब उसी पिपरिया में मूंग के किसानों के साथ धोखा हुआ है, किसानों को भुगतान के रूप में जो बैंक चेक दिए गए, वो बाउंस हो रहे हैं. सिंघौड़ा के रहने वाले विजय सिंह पटेल के पास 30 एकड़ जमीन है, “कुछ दिनों पहले कुछ व्यापारी आए उन्होंने 107 क्विंटल मूंग 6200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेच दी, साढ़े पांच लाख रुपए का चेक मिला जो बाउंस हो गया उन्होंने कहा कुछ पैसा अभी दे रहे हैं, कुछ चेक दे देंगे. चेक लगाया बैंक में वो बाउंस हो गया, एक आवेदन एसडीएम को दिया.. एक थाने में दिया.”

अकेले सिंघौड़ा से लगभग 469 क्विंटल मूंग खरीदकर ये ठग चंपत हो गये. दंगल सिंह ने कहा चेक दिया.. कुछ पैसे खाते में डाले थे, चेक बाउंस हो गया, यही शिकायत की थाने में, तहसील में अभी तक कुछ कार्रवाई नहीं हुई. वहीं पप्पू बाबूलाल के पास 24 एकड़ जमीन है. उन्होंने गुस्से में कहा 80 क्विंटल चोर ले गये, आधार-पैन कार्ड बता के हम व्यापारी हैं, बैंक में रहते हैं, धंधा कर रहे हैं. हमने कहा मंडी में 5000 में बिक रही है, हमसे 6200 में तय कर लिया. व्यापारियों को चेक दिया था वो बाउंस हो गया, उनके घर गये पता लगा वो बैंक में नहीं थे.

किसानों का आरोप है कि ठगों ने इनकी मूंग ठग कर कारोबारियों को 5500 रुपए क्विंटल में बेची है. प्रशासन कह रहा है कि शिकायत मिली है, किसानों के साथ अन्याय नहीं होगा. पिपरिया के तहसीलदार राजेश बोरासी ने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है. किसानों के साथ धोखाधड़ी होती है, तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.

वहीं कांग्रेस नेता पुष्पराज पटेल ने कहा कि हमारे सोहगपुर में 20-22 किसान हैं. कई लोग आएंगे अभी तो… कई किसान कह भी नहीं पा रहे हैं … व्यापारी जिसने मूंग खरीदी है, उसको भी सोचना चाहिये. कहीं ना कहीं एक लाइन में सब मिले जुले हैं. ये चोरी करके ला रहे हैं, वो खरीद रहे हैं 6300-6400 का 5200 में खरीद रहे हैं.

इस सीजन में मूंग का एमएसपी 7196 रु. प्रति क्विंटल है. मध्यप्रदेश में 306 खरीद केन्द्रों पर 15 सितंबर तक सरकारी खरीदी होगी. एक एकड़ खेत मे मूंग की बोवनी जुताई, दवाई, कटाई और मंडी तक बेचने का औसत खर्च 8000 रु होता है. वैसे भी किसानों को मंडी में औसत भाव 5000 रु. मिला, यानी एक एकड़ पर महीनों की मेहनत के बाद भी वो लगभग 18000 बचा पाता है. उससे ही ब्याज, घर खर्च और अगले मौसम की तैयारी होती है.





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